Thursday, 31 January 2013

मेरे हिस्से की धूप !!!


सूरज
सर पर चढ़ आया है....

मेरे आँगन के
आधे हिस्से में ही
धूप चमक रही है

और

आधा हिस्सा
डूबा हुआ है
अंधेरे में !!!

न जाने
किसने मेरे हिस्से की
आधी धूप
चुरा ली है !!!




रविश ‘रवि’

raviishravi.blogspot.com

www.facebook.com/raviish.ravi

Tuesday, 29 January 2013

रोशनी



देखा था फलक पर रात
जिसे रोशनी में दमकते हुए...
सुना है सूरज की रोशनी में
उस ‘चाँद’ ने दम तोड़ दिया.




रविश ‘रवि’



Wednesday, 23 January 2013

जीने का हुनर


यहाँ मसाईलों के अंधेरे हैं बहुत
चलो वक्त की साख से कुछ पत्ते तोड़ लूँ...
गम्-ए-दौरां ने तराशा है मुझे
ऐ ग़ालिब, तुझसे जीने का हुनर सीख लूँ.


रविश ‘रवि’


Friday, 18 January 2013

तेज़ हवा के झोंके.....

तेज़ हवा के झोंके ने 
खिड़की के दरवाज़ों को तिरछा कर दिया....
बारिश की बूंदों ने 
मन की किताब को सीला कर दिया....
वो जो गया था पिछले बरस 
यूँ ही तन्हा छोड़ कर....
आज भी हैं उसके 
गीले क़दमों के निशां इस कमरे में....
यूँ तो साँसे भी हैं चल रही और
ज़िन्दगी भी नहीं थमी....
मगर उसे कोई कैसे बताये,
उसके बगैर ये ज़िन्दगी
भी तो ज़िन्दगी नहीं.

Wednesday, 2 January 2013

नया साल २०१३....


नया साल...
नया दिन...
नयी सुबह...
नयी उम्मीदें....
नया जोश...
नया होसला....

चलो रविश’...

टूटी हुई माला को फिर
पिरोया जाये...

सहमे हुए सपनों को फिर से
संवारा जाये...

दरारें...
जो आ गयी हैं आँखों में,
उन्हें आंसुओं से पाटा जाये...

नमी....
जो जम चुकी है पलकों पर,
सूरज की तपिश से उसे पिघलाया जाये....

और

रेशा-रेशा में जो बिखरा है
मेरे अंदर...

चलो रविश’...

उसे फिर से
ईमारत में
तब्दील किया जाये |






रविश ‘रवि’