Monday, 29 April 2013

हसीं गम


होते हैं गम भी बहुत हसीं
कभी इन्हें भी मुस्कुरा के पिया करो,
होती नहीं हैं सदा ख्वाहिशें पूरी
कभी बिना ख्वाहिशों के भी जिया करो |



रविश 'रवि'
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Friday, 26 April 2013

दौर-ऐ-पैमाना


दौर-ऐ-पैमाना के इन्तेज़ार में
गुजर गयी रात मयखाने में,
आया जब जाम हाथ में
थी न एक भी बूँद पैमाने में.




रविश 'रवि'
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Tuesday, 16 April 2013

टूटे सपनें !!!


बिखरे पड़े हैं
सपने
टूट कर,
किराये की छत पर,
सूरज की तपिश 
डाल देती है
उनमे
कुछ
ओर दरारें,
हर रोज़ !!!  


रविश 'रवि'

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Friday, 12 April 2013

बेरोज़गार !!!


आजकल सूरज
जब सर चढ़ जाता है
तब 
अपना सवेरा 
होता है...

उफ़ !!!

बेरोज़गार 
मै ही तो हूँ....

सूरज
के पास तो 
रोज़गार है.



रविश 'रवि'

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Tuesday, 9 April 2013

चाँद और उजाला


गुजरती हैं तमाम रातें
जिसके साथ आस्मां तले,
घेर लेते हैं,दिन के उजाले
उसे अपनी रोशनी में.



रविश 'रवि'

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Friday, 8 March 2013

लकीरें....


माथे की लकीरों कों खुदा के घर छोड़ आये....
हाथों की लकीरों कों ज़मीं के खुदा खा गए.


रविश 'रवि'

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Wednesday, 27 February 2013

सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 11

 नमस्कार दोस्तों,
आप सब के स्नेह और प्यार के साथ हाज़िर हूँ अपनी नयी रचना "ये अंतहीन सफर !!!" के साथ और जिस तरह से आप ने मुझे अभी तक हर रचना पर अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं से नवाज़ा है, उम्मीद है इस बार भी आप मुझे निराश नही करेंगे......

इस बार आपके विचार कुछ विशिष्ट होंगे क्योंकि मेरी ये रचना "ये अंतहीन सफर !!!" सम्मिलित हुई है 'शोभना फेसबुक रत्न सम्मान-2012' हेतु और मुझे ये सम्मान दिलाने में आपके द्वारा लिखित प्रतिक्रियाओं का भी योगदान रहेगा |

कोशिश करी है कुछ नया और अच्छा लिखने की......बाकि आप मित्रजनो की प्रतिक्रिया से ही पता लग पायेगा कि मै अपने प्रयास में कितना सफल हुआ हूँ.....

आप से सबसे निवेदन है कि नीचे दिए लिंक पर जाकर रचना पढ़ें और comment portion में अपने बहुमूल्य विचार लिखें.........

आपके विचारों की अभिलाषा में.......

रविश 'रवि'


http://www.saadarblogaste.in/2013/02/11.html

 
सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 11: ये अंतहीन सफर !!! न जाने कौन है वो... जिसके लिए चमकता है... रात भर !!! कितनी सदियाँ बीत गयी हैं और अभी कितनी बीतेंगी यूँ ही... फलक...