Monday, 17 June 2013

फिर वही मौसम

वही तो है मौसम आज भी 
और रुत भी वही छाई है,
गए बरस में हुआ था यूँ ही 
तेरी पलकों तले शाम हुई थी...

है मेरे सीने पर आज भी वो
पानी की नन्ही-नन्ही बूंदें
जो तेरे लबों को छू कर
लजा के शर्मसार हुई थीं....

आज फिर बरसें है बादल 
भीगा है मौसम इस तरह
मानों कल ही तेरे शानों पर 
मेरे ख्वाबों की रात हुई थी.



रविश 'रवि'
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Monday, 3 June 2013

जब भी मिलती है

जब भी मिलती है
अजनबी सी मिलती है,
कभी धूप तो कभी
छाँव सी मिलती है,
होती हैं नज़रे दो-चार,
सरे राह पर मिलती है
पर ऐ ज़िंदगी तू रोज़,
रकीब-ए-यार सी मिलती है.



रविश 'रवि'
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Friday, 31 May 2013

मेरे होने की वजह

वो मेरे होने का सिला मांगता है
यूँ मेरे जीने की वजह मांगता है
खिलती है मेरी धूप उसके आंगन में,
वो मेरे मुस्कराने की वजह मांगता है.



रविश 'रवि'
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Thursday, 23 May 2013

ज़िन्दगी के मसाईल

यूँ तो चला था
कारवां लेकर मै
सफ़र कटता गया
कारवां घटता गया

ज़िन्दगी के मसाइलों में
कुछ यूँ फंस गया
था एक परिंदा मै
पर उड़ना भूल गया

मेरे चराग  जला दें
किसी का दामन
अपने दरो-बाम को
अंधेरों में कैद कर लिया

देखूं न कोई ख्वाब
रात-रात भर जाग गया
दुआ को उठें  मेरे हाथ
खुदा से भी किनारा कर लिया


मसाइल : परेशानियां ,   दरो-बाम : दहलीज़ और छत


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Thursday, 16 May 2013

नींद का सौदा


जैसे-जैसे
अक्स-ऐ-शाम
पैर फैलाती है
वैसे-वैसे
दिल बैठता जाता है
रात बैरन फिर आयेगी
नींद का
सौदा करने !!!




रविश 'रवि'
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Monday, 29 April 2013

हसीं गम


होते हैं गम भी बहुत हसीं
कभी इन्हें भी मुस्कुरा के पिया करो,
होती नहीं हैं सदा ख्वाहिशें पूरी
कभी बिना ख्वाहिशों के भी जिया करो |



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Friday, 26 April 2013

दौर-ऐ-पैमाना


दौर-ऐ-पैमाना के इन्तेज़ार में
गुजर गयी रात मयखाने में,
आया जब जाम हाथ में
थी न एक भी बूँद पैमाने में.




रविश 'रवि'
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