Wednesday, 22 July 2015

वही तो है मौसम....

वही तो है मौसम आज भी
और रुत भी वही छाई है,
गए बरस में हुआ था यूँ ही
तेरी पलकों तले शाम हुई थी...

है मेरे सीने पर आज भी वो
पानी की नन्ही-नन्ही बूंदें
जो तेरे लबों को छू कर
लजा के शर्मसार हुई थीं....

आज फिर बरसें है बादल
भीगा है मौसम इस तरह
मानों कल ही तेरे शानों पर
मेरे ख्वाबों की रात हुई थी.


© रविश 'रवि'
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तेरी यादों का मौसम

मौसम ने मिजाज़ बदल कर ली अंगडाई है
तेरी यादों के मौसम की फिर याद आई है,

तेरे जिस्म की खुशबु का पैगाम कुछ यूँ आया
बारिश की बूंदों ने दरवाजे पर दस्तक लगाई है.  


© रविश 'रवि'
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