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Wednesday, 22 July 2015

तेरी यादों का मौसम

मौसम ने मिजाज़ बदल कर ली अंगडाई है
तेरी यादों के मौसम की फिर याद आई है,

तेरे जिस्म की खुशबु का पैगाम कुछ यूँ आया
बारिश की बूंदों ने दरवाजे पर दस्तक लगाई है.  


© रविश 'रवि'
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Sunday, 10 May 2015

उजालों की रहनुमाई

उजालों की रहनुमाई न कर...मेरे मौला
इस कद्र बेइंतहाई न कर...मेरे मौला
चाँद - सितारों की रोशनी के आगे
मोतों की यूँ जगहंसाई न कर...मेरे मौला.



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Tuesday, 5 May 2015

05.05.2015

चलो फिर से
उसी मोड़ पर लोट चलें
जहाँ मिले थे  
कुछ अजनबी ख्यालात
कुछ अजनबी राहें,


चलो फिर से
शुरू करें
एक नया सफ़र
ढूंढें नये रास्ते
मंजिलों की तलाश में,


चलो फिर से
बुने नये ख़्वाब,
ढूंढें नया आसमान
चलो आज फिर से
उसी मोड़ पर लोट चलें.





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Tuesday, 10 March 2015

रूठना-मनाना

अरसा हो गया
तुम्हे मनाये हुए,
बहुत दिनों से तुम
रूठे भी तो नहीं हो !



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Thursday, 22 January 2015

सियासत

बहुत फलफुल रहा है कारोबार बेवफाई का,
शहर में मौसम है चुनाव की गरमाई का,

सियासत में बदल जाते है चेहरे और मोहरे,   
निकलता है यहाँ रोज़, ज़नाज़ा वफाई का.


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Tuesday, 6 January 2015

गया बरस

गया बरस तो यूँ ही गुजर गया
कुछ पाया तो कुछ हाथों से छुठ गया,
दिनों से भी लंबें गुजरें हैं
तसव्वुर तेरे आगोश के,
रातों से भी गहरे निकलें है
लम्स....तेरी यादों के.



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Thursday, 20 November 2014

खुदा हो गया

खुदा कुछ हैरां सा था,कुछ पशेमां सा था
अपने बनाये इंसा से कुछ परेशां सा था,
कल तलक झुकाता था सर जो मेरे दर पे
आज सजदा करते-करते खुद खुदा हो गया.

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Monday, 13 October 2014

आज की रात ....

बहुत मुश्किल से
गुजरेगी आज की रात,
है वादा किसी का
आयेगा आज वो मेरे पास,
सितारों...छुप जाओ
तुम आसमां के आगोश में,
न करो गुफ्तगू
बिता दो रात खामोश में,
चाँद...तु भी
चांदनी को समेट ले
हो  जाए वो रुसवा   
कोई उसे देख न ले.


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Wednesday, 24 September 2014

शिकायत

लोग जीने की ज़िद में जिये जाते हैं 
तुम ज़िद में जीने की बात करते हो,
ज़ख्म देने के लिए इंसां क्या कम हैं 
तुम हवाओं से भी  शिकायत करते हो।


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Wednesday, 20 August 2014

खामोश लब !!!

बहुत कोशिश की आज मुस्कराने की,
 जाने क्यों लब खामोश रह गये ....
दो बूंद अश्क जो रुके थे आँखों में,
वो आँखों ही आँखों में बह गये..

बीत गया एक चक्र और ज़िन्दगी का,
मेरे हाथ आज भी ख़ाली रह गये.....
यूँ तो गुजरे थे मेरी राहगुज़र से,
पर आज भी वो खामोश रह गये |       


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Friday, 15 August 2014

ये मेरा है वतन

ये मेरा है वतन
ये तेरा है वतन
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
ये ही है हम सबकी आरजू
ये ही हमारी जान है.


कभी है रमजान की इबादत
कभी भोले का उदघोष है
कहीं है यीशु की खुश्बू
कहीं नानक का उपदेश है
हैं धर्म अनेक यहाँ पर लहू एक समान है...
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


इंसान तो क्या यहाँ
पत्थर से भी रिश्ते जोड़े जाते हैं...
दूर गगन में बैठे चाँद को भी
हम मामा कह के बुलाते हैं...
मिट्टी और पानी में बसी हमारी जान है
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


राम से है मर्यादा सीखी
गुरु गोबिंद से जोश लिया
कलाम से अग्नि चलाना सिखा  
बुद्ध से शांति का सन्देश लिया
हर तरफ बढ़ रही अपने देश की शान है
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
 

न समझे कोई कमज़ोर हमें
हमें प्यार निभाना आता है udh
दुश्मनों को भी गले लगा कर
अपना दोस्त बनाना आता है
एकता और शांति ही हमारा पैगाम है...
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


उठते है जो हाथ राखी बांधने को 
वो तलवार भी उठा सकते है
गर हो जरुरत तो कलम के सिपाही
दुश्मन को मारने का जिगर भी रखते हैं
अपने तिरंगे पर जान अपनी कुरबान है....
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
 

ये मेरा है वतन
ये तेरा है वतन
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
ये ही है हम सबकी आरजू
ये ही हमारी जान है.


© रविश 'रवि'
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