Wednesday, 20 August 2014

खामोश लब !!!

बहुत कोशिश की आज मुस्कराने की,
 जाने क्यों लब खामोश रह गये ....
दो बूंद अश्क जो रुके थे आँखों में,
वो आँखों ही आँखों में बह गये..

बीत गया एक चक्र और ज़िन्दगी का,
मेरे हाथ आज भी ख़ाली रह गये.....
यूँ तो गुजरे थे मेरी राहगुज़र से,
पर आज भी वो खामोश रह गये |       


© रविश 'रवि'
raviishravi.blogspot.com

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