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Monday, 20 April 2015

सियासत-रियासत

ये सियासत भी गज़ब रियासत है
हर बात पर रोटियाँ सेकी जाती हैं,
उड़ा कर मज़ाक तेरी-मेरी बेबसी का
यहाँ मेले में मेजें थपथपाई जाती हैं,


© रविश 'रवि'
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Monday, 24 March 2014

दौरे - सियासत

ये कैसा दौरे - आलम है सियासत का ग़ालिब
पैमाना-ए-वफ़ा के पैमाने छूटे और टूटे जाते हैं
सुबह तलक सुनाते हैं जो किस्सा -ए- रफ़ीक   
शाम ढले रकीबों की कतार में नज़र आते हैं.


 रफ़ीक – दोस्त ,   रकीब – विरोधी

© रविश 'रवि'
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Sunday, 9 February 2014

मुफलिसी

ये कैसी हवा चली है ए ग़ालिब
मुफलिसी भी नीलम हुयी जाती है
उडाकर मजाक गरीबों की भूख का
सियासत की रोटी सेकी जाती है.



रविश 'रवि'
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