Tuesday, 18 March 2014

हया का रंग

होली में
जब तुम्हारे गालों पर
गुलाल लगाया था...

न जाने

गुलाल से
गालों पर 
हया का रंग
उभर आया था

या फिर

तुम्हारे गालों से
कुछ रंग चुरा कर
गुलाल
और लाल हो गया था ?


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Tuesday, 11 March 2014

खामोश लब

बहुत कोशिश की आज मुस्कराने की,
न जाने क्यों लब खामोश रह गए ....

दो बूंद अश्क जो रुके थे आँखों में,
वो आँखों ही आँखों में बह गए....

बीत गया एक चक्र और ज़िन्दगी का,
मेरे हाथ आज भी ख़ाली रह गए.....

यूँ तो गुजरे थे मेरी रह-गुज़र से,
पर आज भी वो खामोश रह गए |


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Monday, 3 March 2014

सर्द सुबह!

सर्द मौसम की
सर्द सुबह!
और
तुम्हारा
स्टेशन  पर
मिलने आना....
आज भी
रखी है
वो सर्द सुबह यूँ ही...
मेरी गुल्लक में.



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Thursday, 20 February 2014

ये साल

एक नजूमी* ने कहा था, ये साल अच्छा गुजरेगा,
कुछ और दोस्तों की नज़र में, मै बेवफा हो गया.


* ज्योतिषी
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Monday, 17 February 2014

तपिश और चांदनी

कुछ तपिश चाँद की चुरा लेता हूँ
कुछ चांदनी सूरज की चुरा लेता हूँ,
कभी इसके साथ सहर बसर कर लेता हूँ
कभी उसके साथ शाम गुजर कर लेता हूँ
|




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Sunday, 9 February 2014

मुफलिसी

ये कैसी हवा चली है ए ग़ालिब
मुफलिसी भी नीलम हुयी जाती है
उडाकर मजाक गरीबों की भूख का
सियासत की रोटी सेकी जाती है.



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Monday, 3 February 2014

सर्दियों की सुबह

कोहरे की चादर में
लिपटी सड़कें
अलसाता हुआ आलम  
रजाई के गर्माइश में
लिपटा जिस्म
सर्दियों में
सुबह अक्सर
ऐसे ही होती है.



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