Friday, 15 August 2014

ये मेरा है वतन

ये मेरा है वतन
ये तेरा है वतन
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
ये ही है हम सबकी आरजू
ये ही हमारी जान है.


कभी है रमजान की इबादत
कभी भोले का उदघोष है
कहीं है यीशु की खुश्बू
कहीं नानक का उपदेश है
हैं धर्म अनेक यहाँ पर लहू एक समान है...
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


इंसान तो क्या यहाँ
पत्थर से भी रिश्ते जोड़े जाते हैं...
दूर गगन में बैठे चाँद को भी
हम मामा कह के बुलाते हैं...
मिट्टी और पानी में बसी हमारी जान है
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


राम से है मर्यादा सीखी
गुरु गोबिंद से जोश लिया
कलाम से अग्नि चलाना सिखा  
बुद्ध से शांति का सन्देश लिया
हर तरफ बढ़ रही अपने देश की शान है
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
 

न समझे कोई कमज़ोर हमें
हमें प्यार निभाना आता है udh
दुश्मनों को भी गले लगा कर
अपना दोस्त बनाना आता है
एकता और शांति ही हमारा पैगाम है...
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...


उठते है जो हाथ राखी बांधने को 
वो तलवार भी उठा सकते है
गर हो जरुरत तो कलम के सिपाही
दुश्मन को मारने का जिगर भी रखते हैं
अपने तिरंगे पर जान अपनी कुरबान है....
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
 

ये मेरा है वतन
ये तेरा है वतन
ये हम सबका है वतन....
कहते जिसे हिन्दुस्तान हैं...
ये ही है हम सबकी आरजू
ये ही हमारी जान है.


© रविश 'रवि'
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Wednesday, 13 August 2014

अँधेरे !!!

सूरज से कहो
रात में भी
निकला करे....
काले अंधेरों से
डर लगता है !


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Tuesday, 29 July 2014

चारागार

दिन चढ़े से दिन ढल भी गया
फ़िज़ूल ही तेरी महफ़िल में आया
ख़ामोश साँसें भी बोल पड़ती थीं
जिसे देख कर,वो चारागार न आया.


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Saturday, 12 July 2014

उनका पता

कल फलक पर था चाँद पूरा का पूरा,
और मै था जमीं पर कुछ अधूरा-अधूरा,
गुजार दी शब् महकती चांदनी के साये में,
करता रहा इकट्ठा तारों को उसके इंतज़ार में,
ना हिज्र का मौसम थाना वस्ल की ही बात थी,
ये तो बस आँखों ही आँखों में कटी फिर एक रात थी,
वो ना आये और ना ही हवाओं ने कोई खबर दी,
हमने भी एक और रात उनके नाम कर दी,
अब ये मसाफ़त हो कैसे तै, ऐ चाँद तू ही बता,
या तो दे-दे उनकी खबर नहीं तो दे-दे उन्हें मेरा पता|



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Thursday, 5 June 2014

उफ्फ़...ये गर्मी !

उफ्फ़...ये गर्मी !
न जाने कितनो को
तड़पा कर जायेगी
न जाने कितनो की जां
ले कर जायेगी,

लगता है इस बार
गर्मी के दिल ने
गहरी चोट खायी है,
इस साल की गर्मी
बहुत दिलजली है !



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Tuesday, 27 May 2014

चाँद की बेचैनी !!!!

चाँद में है बेचैनी
और
तारों में भी है कुछ
सुगबुगाहट सी....
बस
कुछ और पल
और जायेगा
सूरज
उनकी रोशनी का
सौदा करने !!!!

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Monday, 12 May 2014

कुछ ख्वाब पलते

दूर उफ़क पर कुछ ख्वाब पलते हैं
दूर उफ़क पर कुछ ख्वाब ढलते हैं

जब भी लम्हा टूट कर गिरा है आसमां से
मेरे होठों पर तेरी सांसों के चराग जलते हैं

ये शाम ठहर जाती है तेरी सुरमई आँखों में
मेरे जिस्म पर तेरी यादों के नक्श खींचतें हैं

रात ठहर जाती है तेरे कांधे के तिल के तले
मेरी रूह में तेरी रूह के गुलाब मिलते हैं.  



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