Wednesday, 22 July 2015

वही तो है मौसम....

वही तो है मौसम आज भी
और रुत भी वही छाई है,
गए बरस में हुआ था यूँ ही
तेरी पलकों तले शाम हुई थी...

है मेरे सीने पर आज भी वो
पानी की नन्ही-नन्ही बूंदें
जो तेरे लबों को छू कर
लजा के शर्मसार हुई थीं....

आज फिर बरसें है बादल
भीगा है मौसम इस तरह
मानों कल ही तेरे शानों पर
मेरे ख्वाबों की रात हुई थी.


© रविश 'रवि'
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तेरी यादों का मौसम

मौसम ने मिजाज़ बदल कर ली अंगडाई है
तेरी यादों के मौसम की फिर याद आई है,

तेरे जिस्म की खुशबु का पैगाम कुछ यूँ आया
बारिश की बूंदों ने दरवाजे पर दस्तक लगाई है.  


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Wednesday, 3 June 2015

फलक पर चाँद

कल फलक पर था चाँद पूरा का पूरा,
और मै था जमीं पर कुछ अधुरा-अधुरा,

गुजार दी शब महकती चांदनी के साए में,
करता रहा इकट्ठा तारों को उसके इंतज़ार में,

ना हिज्र का मौसम थाना वस्ल की ही बात थी,
ये तो बस आँखों ही आँखों में कटी फिर एक रात थी,

वो ना आये और ना ही हवाओं ने कोई खबर दी,
हमने भी एक और रात उनके नाम कर दी,

अब ये मसाफ़त हो कैसे तै, ऐ चाँद तू ही बता,
या तो दे-दे उनकी खबर नहीं तो दे-दे उन्हें मेरा पता |




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Sunday, 10 May 2015

उजालों की रहनुमाई

उजालों की रहनुमाई न कर...मेरे मौला
इस कद्र बेइंतहाई न कर...मेरे मौला
चाँद - सितारों की रोशनी के आगे
मोतों की यूँ जगहंसाई न कर...मेरे मौला.



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Tuesday, 5 May 2015

05.05.2015

चलो फिर से
उसी मोड़ पर लोट चलें
जहाँ मिले थे  
कुछ अजनबी ख्यालात
कुछ अजनबी राहें,


चलो फिर से
शुरू करें
एक नया सफ़र
ढूंढें नये रास्ते
मंजिलों की तलाश में,


चलो फिर से
बुने नये ख़्वाब,
ढूंढें नया आसमान
चलो आज फिर से
उसी मोड़ पर लोट चलें.





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Monday, 20 April 2015

सियासत-रियासत

ये सियासत भी गज़ब रियासत है
हर बात पर रोटियाँ सेकी जाती हैं,
उड़ा कर मज़ाक तेरी-मेरी बेबसी का
यहाँ मेले में मेजें थपथपाई जाती हैं,


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Wednesday, 15 April 2015

चाँद की बेचैनी !!!!

चाँद में है बेचैनी
और
तारों में भी है कुछ
सुगबुगाहट सी....
बस 
कुछ और पल
और आ जायेगा
सूरज
उनकी रोशनी का 
सौदा करने !!!!


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